Monday, December 28

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दिन  का  उजाला  हो  या ,
रात  का  अँधेरा ,
हर  पल , हर  वक्त ,
नज़र  आया  तोह  बस ,
आया , चेहरा  तेरा .

हर  पल  को  जोड़ा ,
तोह  बना  सपना  तेरा ,
सपना  जब  सच  करने  चले ,
तोह , ना  रहे  तुम , और ,
ना  रहा  कोई  पल  मेरा .

जब  तुम्हारा  था  साथ ,
किसी  के  लिए ,
वक्त  न  था  हमारे  पास ,
आज  जब  रह  गया  तुम्हारा  ख्वाब ,
हर  वक्त , हर  लम्हा  दिल  जले ,
जैसे  जले ,
पत्ते  में  तेज़ाब .

पास  जब  तुम  थे ,
बातों  बातों  में ,
निकलती  थी  एक  और  बात .
आज  जब  तुम  नहीं ,
अब  बस  वोही  बातें  याद  आये ,
बनकर  एक  गीत  हर  रात .

दिल  पे  लिखा  नाम ,
दिखा  था  कभी ,
हाथ  की  लकीरों  में ,
दिल  टूट  गए ,
लकीरें  मिट  गयी ,
बस , रह  गए  हम  तुम ,
फिर  इन्ही  कुछ  तस्वीरों  में .

आज  भी  तड़पता  है  दिल ,
हर  दम , बस , तुम्हारा  है  ख्याल ,
कैसे  पूरी  होगी  यह  ज़िन्दगी  अब  तुम्हारे  बिन ,
हर  राह , हर  मोड़ , हर  शुन ,
अब  बस  यही  है  सवाल .

4 comments:

  1. man, mindblowing post.... reading this post, any gal will fal 4 u,no matter ur a casanova... :)

    keep writing such poems.... i guess 1st hindi poem from u.... but still excellent..

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  2. thanku thanku thanku!!!

    m flattered beere...

    wait for my next hindi poem...almost dunn with that too!!!

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  3. amazing post dude!. Does nt seem a Chemical Engineer wrote dat..
    I agree with Sumit above.. Girls will fall for this poem pal..
    Keep writing and then gift ur beloved by compiling a book for her:)

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  4. thanks Rhydmez,

    seeing your comment now i myself cannot believe a chemical engg. wrote this poem....hehehe

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