Tuesday, March 18

हम तब होली मनाते है

हम तब होली मनाते है,
जब फूलों के रंग और अधिक खिले खिले नज़र आते है,
आस्मा में काले बादल , नया रूप ले कर आते है,
मन के सारे भेद मिटाकर, प्यार के रंग में रंग जाते है,
आपसी दूरियां जब कम हो जाए,
होली के गीत गाते है,
हम तब होली मानते है.
जब बूढे रंगों से तिलक लगाते है,
और बच्चे पिचकारी से लोगों पर रंग बरसाते है,
सावन झूम जाता है जब,
प्रेमी प्रेमिका रंगों से अपना प्यार दिखलाते है,
और मिल जाए दिल जब,
हम तब होली मनाते है.
रंग जब पानी में मिल जाए तो एक नया इन्द्रधनुष दिखलाते है,
लाल, पीला, नीला, हरा सभी रंग एक पर्व पर आते है,
हम तब होली मनाते है.
हर साल, झूम झूम कर आते है यह त्यौहार,
यही बात बतलाता है कि,
दुश्मनी को भूल जाओ, प्यार के गीत गाओ,
और बिखेर दो रंगों को अपनी ज़िंदगी में.
तभी इस पर्व का अर्थ सामने आता है,
इसलिए आज यह कवि आपके साथ, होली का त्यौहार मनाता है.

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